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कूड़ा बीनने वाली मां के बेटे ने बनाई IFS अफसर की कामयाबी
मुंबई की झुग्गियों से निकलकर IIT मद्रास पढ़ने वाले गौतम पाडीभार आज भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं। इस असाधारण सफलता के पीछे उनकी मां की कुर्बानी और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरक कहानी है।
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मुंबई के स्लम इलाकों में कूड़ा बीनकर गुजारा करने वाली एक मां अपने बेटे को शिक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करती रहीं। आर्थिक संकट और सामाजिक बाधाओं के बावजूद उस मां ने अपने बेटे गौतम पाडीभार का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
गौतम पाडीभार की मेहनत और मां के संघर्ष का परिणाम था कि वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में प्रवेश पा सके। वहां से स्नातक होने के बाद उन्होंने भारतीय वन सेवा की परीक्षा पास की और आज एक सफल सरकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
जब गौतम पाडीभार ने अपनी मां को सरकारी कार्यालय में अपनी कुर्सी पर बिठाया, तो वह पल समाज के लिए एक प्रेरणादायक क्षण बन गया। इस घटना का सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार हुआ और यह कहानी उन हजारों माताओं के लिए प्रतीक बन गई जो अपनी संतान के भविष्य के लिए कठोर परिश्रम करती हैं।
पाडीभार की कहानी यह सिद्ध करती है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे भी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से समाज में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं। माता-पिता की बलिदान और बच्चों के सपनों का यह अद्भुत मेल ही वास्तव में राष्ट्र की असली संपत्ति है।