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शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र श्वेत बौने तारों को चंद्रशेखर सीमा से परे बढ़ने दे सकते हैं: आईआईएससी
भारतीय विज्ञान संस्थान के एक अध्ययन में पाया गया है कि तीव्र चुंबकीय क्षेत्र श्वेत बौने तारों को परंपरागत रूप से स्वीकृत द्रव्यमान सीमा से अधिक विशाल होने की अनुमति दे सकते हैं।
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भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ताओं ने खगोल विज्ञान के एक मौलिक सिद्धांत को चुनौती देने वाला एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किया है। उनके अध्ययन के अनुसार, शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र श्वेत बौने तारों को चंद्रशेखर सीमा से अधिक विशाल होने में सक्षम बना सकते हैं, जो पहले असंभव माना जाता था।
चंद्रशेखर सीमा, जिसका नाम प्रसिद्ध भारतीय भौतिकविद् सुब्रह्मण्यन् चंद्रशेखर के नाम पर रखा गया है, श्वेत बौने तारे के अधिकतम द्रव्यमान को परिभाषित करती है। यह माना जाता था कि इस सीमा को पार करने वाला कोई भी श्वेत बौना तारा तारकीय विस्फोट की ओर बढ़ता है। हालांकि, आईआईएससी के शोध दल का विश्लेषण दर्शाता है कि चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता इस परिणति को बदल सकती है।
इस खोज के निहितार्थ तारकीय विकास और ब्रह्मांड की गतिविधियों की हमारी समझ के लिए महत्वपूर्ण हैं। श्वेत बौने तारे ब्रह्मांड में सबसे सघन वस्तुओं में से हैं, और उनका अध्ययन अत्यधिक दबाव और चुंबकीय क्षेत्र की परिस्थितियों में पदार्थ के व्यवहार को समझने में मदद करता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह निष्कर्ष पुरे खगोल विज्ञान समुदाय के लिए महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करता है और आगे के अवलोकन तथा सैद्धांतिक अध्ययनों के लिए नई दिशा प्रदान करता है।