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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रैंकिंग को खत्म करने की मांग
भारतीय विज्ञान संस्थान की एक टीम ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग प्रणाली को समाप्त करने का आह्वान किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ढांचे में गंभीर खामियां और संरचनात्मक हित-विरोध की समस्याएं हैं।
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भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) की एक शोध टीम ने केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण कार्यक्रम की रैंकिंग व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। टीम की रिपोर्ट के अनुसार, यह ढांचा महत्वपूर्ण त्रुटियों और कमजोरियों से ग्रस्त है जो इसकी विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं।
रिपोर्ट में उजागर की गई प्रमुख समस्या शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) द्वारा स्व-मूल्यांकन का मुद्दा है। इसके कारण संरचनात्मक हित-विरोध की स्थिति बनती है, जहां मूल्यांकन करने वाली संस्थाएं ही मूल्यांकित होती हैं। यह व्यवस्था वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित नहीं करती।
आईआईएससी की टीम का तर्क है कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए रैंकिंग प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन अथवा इसे पूरी तरह से हटाया जाना आवश्यक है। टीम ने सुझाव दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अन्य अधिक प्रभावी और पारदर्शी तंत्र अपनाए जाने चाहिए।
यह खोज देश के वायु गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस रिपोर्ट को भारत के वायु प्रदूषण मुकाबले की रणनीति में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।