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यूपीआई एमडीआर ढांचे को तर्कसंगत बनाने की जरूरत: आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट
आईआईटी बॉम्बे ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट को केवल 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले व्यवसायों पर लागू करने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से डिजिटल भुगतान में जनता का विश्वास बरकरार रहेगा।
LSN India ·
डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आईआईटी बॉम्बे की एक विस्तृत रिपोर्ट में यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे में सुधार की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान नीति को तर्कसंगत बनाने से डिजिटल लेनदेन के प्रति व्यापारियों और उपभोक्ताओं का आस्था बढ़ेगा।
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, एमडीआर संरचना को केवल उन व्यावसायिक संस्थाओं पर लागू किया जाना चाहिए जिनका वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। विशेषज्ञों का विचार है कि छोटे और मध्यम व्यवसायों को इस शुल्क से मुक्त रखने से डिजिटल भुगतान को अपनाने में गति आएगी।
वर्तमान यूपीआई नीति में एमडीआर संरचना को लेकर विभिन्न हितधारकों में मतभेद रहा है। बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को आय का स्रोत न मिलने से सेवा में गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि छोटे व्यापारियों का कहना है कि ये शुल्क उनके लिए अव्यावहारिक हैं।
आईआईटी बॉम्बे की सिफारिश को एक संतुलित दृष्टिकोण माना जा रहा है जो सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नीति न केवल डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करेगी बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी।