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आईआईटी बॉम्बे ने जाति पर सवालों पर लगाई पाबंदी, छात्र विरोध तेज
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे ने अपने परिसर में जाति और संयुक्त प्रवेश परीक्षा रैंकिंग से संबंधित सवालों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे छात्रों का विरोध तेज हो गया है।
LSN India ·

मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे ने परिसर में जाति और जेईई रैंकिंग संबंधी चर्चा पर कड़ी पाबंदियां लागू की हैं। इस कदम के विरुद्ध छात्रों का विरोध-प्रदर्शन तेजी से बढ़ रहा है। संस्थान प्रशासन का यह निर्णय समावेशी शिक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बहस को दबाने का प्रयास माना जा रहा है।
छात्र संगठनों का कहना है कि यह प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और परिसर में लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाता है। वे तर्क दे रहे हैं कि सामाजिक असमानता और शैक्षणिक प्रणाली से संबंधित मुद्दों पर खुली चर्चा आवश्यक है। कई छात्रों ने इस नीति को वापस लेने के लिए हस्ताक्षर अभियान और सभाएं शुरू की हैं।
आईआईटी बॉम्बे ने अभी तक इस निर्णय के पीछे का विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया है। संस्थान की ओर से कहा जाना है कि यह नियम परिसर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए लागू किया गया है। हालांकि, छात्र नेतृत्व इस व्याख्या को स्वीकार नहीं कर रहा है।
यह घटना भारतीय शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में जाति आधारित आरक्षण और समावेशन के मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आई है। विश्वविद्यालय परिसरों में ऐसे प्रतिबंध लगाने की प्रथा को शिक्षाविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आलोचनात्मक दृष्टि से देखा है।