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आईआईटी ने पीएचडी के लिए नया मॉडल पेश किया, थीसिस अनिवार्य नहीं
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने डॉक्टरल कार्यक्रम में एक अभिनव बदलाव किया है, जहां शोध प्रबंध की जगह वैकल्पिक मार्ग अपनाए जा सकेंगे। यह कदम अनुसंधान में विविधता लाने का प्रयास है।
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भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक आईआईटी ने पीएचडी कार्यक्रम के लिए परंपरागत थीसिस आवश्यकता को हटाते हुए एक नया शैक्षणिक मॉडल अपनाया है। इस नीति के तहत विद्यार्थियों को डॉक्टरल डिग्री प्राप्त करने के लिए एक विस्तृत शोध प्रबंध लिखना अनिवार्य नहीं रहेगा।
आईआईटी का मानना है कि यह नया दृष्टिकोण शोधार्थियों को विभिन्न प्रकार के अनुसंधान कार्य करने की स्वतंत्रता देगा। अब विद्यार्थी थीसिस की जगह प्रकाशित शोधपत्रों, व्यावहारिक प्रकल्पों या अन्य मूल अनुसंधान योगदान के माध्यम से अपनी डॉक्टरल आवश्यकताएं पूरी कर सकेंगे।
यह परिवर्तन उच्च शिक्षा में बढ़ती लचीलेपन की प्रवृत्ति का हिस्सा है। संस्थान का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं खोलना है।
इस नीति से आशा की जा रही है कि यह छात्रों को उनकी रुचि और शक्ति के अनुसार अनुसंधान के मार्ग चुनने में सहायता करेगी, जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता और विविधता दोनों में सुधार होगा।