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आईआईटी मांडी में वर्ण व्यवस्था पोस्टर को लेकर विवाद, निदेशक ने छात्रों की व्याख्या पर सवाल उठाए
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मांडी में 'भगवद्गीता - कालजयी ज्ञान' शीर्षक से एक पोस्टर लगाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्णों में विभाजित किया गया था, जिसके कारण संस्थान में बहस छिड़ गई है।
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आईआईटी मांडी के निदेशक ने संस्थान के सभागार के बाहर लगाए गए एक विवादास्पद पोस्टर की जांच को लेकर एक विज्ञप्ति जारी की है। इस पोस्टर में प्राचीन भारतीय वर्ण व्यवस्था के आधार पर समाज को चार श्रेणियों में बांटा गया था, जिससे संस्थान के भीतर गहरी असहमति पैदा हुई है।
निदेशक के अनुसार, पोस्टर में दर्शाई गई सामग्री को कुछ छात्रों द्वारा गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने कहा कि मूल संदेश को विकृत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। संस्थान प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच की घोषणा की है ताकि विवाद को स्पष्ट किया जा सके।
वर्ण व्यवस्था से संबंधित इस तरह के मुद्दों को लेकर भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में समय-समय पर विवाद देखे जाते हैं। आईआईटी मांडी के प्रशासन का कहना है कि वह समावेशी माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्थान ने सभी हितधारकों से इस संवेदनशील विषय पर संवादमूलक चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। प्रशासन का मानना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक सामग्री की सही व्याख्या करना आवश्यक है ताकि किसी को ठेस न पहुंचे और शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।