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आईआईटी की महिला-केंद्रित योजना से जेईई में लैंगिक अंतराल घटने के संकेत
जेईई (एडवांस्ड) 2026 में महिला आवेदकों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस परीक्षा में शामिल 43,112 महिलाओं में से 10,107 ने सफलता हासिल की, जो 23.4 प्रतिशत की सफलता दर दर्शाता है।
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) द्वारा शुरू की गई महिला-केंद्रित आसन योजना इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में लैंगिक असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जेईई (एडवांस्ड) 2026 के परिणामों से स्पष्ट है कि इस दिशा में ठोस प्रयास फल दे रहे हैं।
इस वर्ष परीक्षा में 43,112 महिला उम्मीदवार पंजीकृत हुईं, जिनमें से 10,107 ने अर्हता प्राप्त की। यह 23.4 प्रतिशत की सफलता दर को दर्शाता है, जो महिला भागीदारी में बढ़ोतरी का प्रमाण है। आईआईटी संस्थानों द्वारा आरक्षित महिला-केंद्रित सीटें इस सकारात्मक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित कर रही हैं।
इंजीनियरिंग क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी लंबे समय से एक चिंता का विषय रहा है। आईआईटी द्वारा अपनाई गई यह रणनीति न केवल आवेदकों को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत के इंजीनियरिंग संस्थानों में महिला छात्राओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई दे सकती है। आईआईटी की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।