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नागरिक उड्डयन मंत्रालय को स्वतंत्र निकाय बनाने का प्रस्ताव
सरकार के समक्ष एक प्रस्ताव है कि नागरिक उड्डयन नियामक को स्वायत्त संगठन बनाया जाए। इस नए ढांचे में यात्रियों पर 15 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है।
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नागरिक उड्डयन क्षेत्र के नियामन को और प्रभावी बनाने के लिए सरकार के पास एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव विचारधीन है। प्रस्ताव में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को एक स्वतंत्र निकाय में रूपांतरित करने की अनुशंसा की गई है, जिसे अपने स्वयं के कर्मचारी नियुक्ति और वित्तीय संसाधन मिलेंगे।
प्रस्तावित नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएएआई) के तहत इस स्वायत्तता से नियामक संगठन को अधिक लचकदार और प्रतिक्रियाशील बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में डीजीसीए सरकारी ढांचे के अंदर संचालित होता है, जिससे कई बार कार्यात्मक बाधाएं आती हैं।
इस नए संरचना को वित्तीय रूप से सुदृढ़ करने के लिए हवाई यात्रियों पर 15 रुपये का प्रति टिकट शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है। इस राजस्व से निकाय के संचालन, आधुनिकीकरण और कर्मचारी वेतन जैसे खर्चों को पूरा किया जा सकेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्वतंत्र विनियामक निकाय भारतीय विमानन उद्योग की बेहतरी के लिए अत्यावश्यक है। यह नई व्यवस्था यात्री सुरक्षा मानकों में सुधार लाने और विमानन सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक साबित हो सकती है।