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भारत-मॉरीशस कर संधि में सुधार, टैक्स लाभों पर नई पाबंदी
भारत ने मॉरीशस के साथ कर संधि में संशोधन कर एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षण जोड़ा है। यह नए नियम उन लेनदेन में कर लाभों को रोकने की अनुमति देता है जहां मुख्य उद्देश्य केवल कर बचत होता है।
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भारत सरकार ने मॉरीशस के साथ अपनी कर संधि को संशोधित करके एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस संशोधन के माध्यम से भारत ने कर संधि के लाभों को हासिल करने के लिए किए जाने वाले कृत्रिम लेनदेन को रोकने के लिए एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षण (प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट) शामिल किया है।
इस नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी लेनदेन का मुख्य उद्देश्य केवल कर संबंधी लाभ प्राप्त करना है, तो भारतीय कर प्राधिकार ऐसे लेनदेन में संधि के तहत प्राप्त होने वाले कर लाभों को रद्द कर सकते हैं। यह कदम विदेशी निवेशकों द्वारा कर बचत की योजनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।
मॉरीशस भारतीय निवेशकों और विदेशी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र रहा है। यह संशोधन भारत के उन प्रयासों का हिस्सा है जो कर संधियों के माध्यम से अनुचित कर लाभ प्राप्त करने से रोकना चाहते हैं। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों ने इसी तरह के प्रमुख उद्देश्य परीक्षण को अपनाया है।
यह संशोधन भारत की कर नीति में एक नया दिशा दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि अंतर्राष्ट्रीय कर संधियों का दुरुपयोग न हो। भारत के लिए यह कदम राजस्व संरक्षण और न्यायसंगत कर प्रणाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगा।