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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता युग में नई रणनीति जरूरी: मुख्य आर्थिक सलाहकार
मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा है कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में अपने विकास मॉडल पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि प्रযुक्ति कर्मचारियों को प्रतिस्थापित करने की बजाय उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जानी चाहिए।
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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने देश की अर्थव्यवस्था को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचने का आकलन किया है। नागेश्वरन का मानना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति के संदर्भ में भारत के विकास की रणनीति में आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक विनाशकारी शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि मानव कार्यबल को मजबूत करने और उत्पादकता बढ़ाने के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। यह दृष्टिकोण पारंपरिक विकास मॉडल से अलग है जहां प्रौद्योगिकी अक्सर कर्मचारियों के स्थान पर आती है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार का यह विचार इस बात को दर्शाता है कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था को इस नई परिस्थिति में अपनी बड़ी जनसंख्या को लाभ में बदलने का अवसर दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि सही नीतिगत निर्णय लिए जाएं तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए अधिक रोजगार और आय के नए अवसर सृजित कर सकती है।
यह दृष्टिकोण भारतीय नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि केवल आर्थिक वृद्धि ही नहीं, बल्कि समावेशी और टिकाऊ विकास को सुनिश्चित करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।