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भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग: नदी जल विवादों का समाधान
1971 के युद्ध के बाद भारत और बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच नदी जल से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए संयुक्त नदी आयोग की स्थापना की। यह आयोग दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय जल साझेदारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
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भारत और बांग्लादेश के बीच साझा नदियों से उत्पन्न होने वाले जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए 1972 में संयुक्त नदी आयोग (जेआरसी) की स्थापना की गई थी। यह निकाय दोनों देशों के बीच जल संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे, बाढ़ नियंत्रण और जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित मामलों को देखता है।
गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेघना और अन्य सीमावर्ती नदियां दोनों देशों की भौगोलिक और आर्थिक संरचना का केंद्रीय हिस्सा हैं। इन नदियों पर भारत की ऊपरी पकड़ होने के कारण जल बंटवारे के मुद्दे ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। संयुक्त आयोग ने इन विवादों को द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से समाधान करने का मार्ग प्रशस्त किया।
आयोग की संरचना भारत और बांग्लादेश दोनों की ओर से वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञों और अधिकारियों से बनी होती है। यह नियमित बैठकें आयोजित करता है, सर्वेक्षण करता है और तकनीकी अध्ययन संचालित करता है। विभिन्न प्रोटोकॉल और समझौते इस आयोग के माध्यम से ही सुनिश्चित किए गए हैं।
दशकों से इस आयोग की कार्यप्रणाली ने दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गंगा नदी के जल के बंटवारे के संदर्भ में 1996 का ऐतिहासिक समझौता इसी आयोग की सफलता का प्रमाण है। हालांकि मौसमी बाढ़ और सूखे जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन संयुक्त नदी आयोग सहयोग का एक स्थायी मंच बना हुआ है।