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भारत-भूटान की संयुक्त कोशिशों से एक सींग वाले गैंडे की आबादी बढ़ी
मानस टाइगर रिजर्व में एक दशक में गैंडों की संख्या शून्य से बढ़कर 48 हो गई है। हालांकि, इस शाकाहारी जानवर की सीमा पार गतिविधियां अब नई चिंताएं पैदा कर रही हैं।
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विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर भारत और भूटान अपने संयुक्त संरक्षण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। असम के मानस टाइगर रिजर्व में चलाई गई पुनर्स्थापना परियोजना दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण की सफलता की कहानी है।
इस परियोजना के तहत पिछले दो दशकों में एक सींग वाले गैंडों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां 20 साल पहले रिजर्व में इन जानवरों की संख्या शून्य थी, वहीं वर्तमान में यह आबादी 48 तक पहुंच गई है। यह संख्या भारत और भूटान की सीमावर्ती क्षेत्रों में संरक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
हालांकि, इस सफलता के साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है। एक सींग वाले गैंडों की बढ़ती आबादी के कारण ये जानवर भारत और भूटान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करने लगे हैं। इस सीमा पार गतिविधि से दोनों देशों के संरक्षण प्राधिकारियों के लिए नई समस्याएं खड़ी हुई हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ इस स्थिति को प्रबंधित करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। भारत और भूटान को सीमावर्ती क्षेत्रों में गैंडों की आवाजाही पर नजर रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित रणनीति विकसित करनी होगी। दोनों देशों की मजबूत साझेदारी इस महत्वपूर्ण प्रजाति के दीर्घकालीन संरक्षण की कुंजी बनी हुई है।