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कंडला में देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथेनॉल संयंत्र की नींव रखी गई
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के स्थल पर 2,300 करोड़ रुपये की परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। डीपीए और असम पेट्रो-केमिकल्स इस महत्वाकांक्षी परियोजना को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाएंगे।
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गुजरात के कंडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण में भारत का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथेनॉल संयंत्र स्थापित करने की परियोजना की नींव रख दी गई है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना 2,300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार की जाएगी और देश में हरित ईंधन के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड इस परियोजना को संयुक्त रूप से विकसित करेंगे। संयंत्र का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा, जिससे सुनियोजित विकास और निष्पादन सुनिश्चित हो सके।
ई-मेथेनॉल, जिसे सस्टेनेबल मेथेनॉल भी कहा जाता है, शिपिंग और परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक प्रमुख विकल्प है। कंडला में इस संयंत्र की स्थापना से न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बंदरगाह के आसपास के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।
यह परियोजना भारत की हरित संक्रमण नीति के अनुरूप है और देश को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री उद्योग में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी। संयंत्र के पूर्ण संचालन से पर्यावरण के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।