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पांच महीने में खर्च हुआ साल भर का 58 प्रतिशत खाद सब्सिडी बजट

वैश्विक बाजार में खाद की कीमतों में तेजी के कारण भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित सब्सिडी का आधे से अधिक हिस्सा मात्र पांच महीने में खर्च कर दिया है। इससे सरकार के अतिरिक्त खर्च की संभावना बढ़ गई है।

LSN India · 24 August 2026

पांच महीने में खर्च हुआ साल भर का 58 प्रतिशत खाद सब्सिडी बजट

भारत की खाद सब्सिडी योजना पर वित्त वर्ष 2026-27 में आने वाले खर्च से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार को अपना बजट बढ़ाना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे भारतीय किसानों को सब्सिडी देने का सरकारी दायित्व भी बढ़ गया है।

पहले पांच महीनों में ही बजट का 58 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि साल के बाकी सात महीनों में सरकार के खर्च को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती होगी। खाद आयात की लागत में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान इसके मुख्य कारण हैं।

कृषि क्षेत्र में सब्सिडी एक महत्वपूर्ण नीति साधन है जो सरकार के माध्यम से किसानों को उर्वरकों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराती है। हालांकि, बढ़ते खर्च से सरकार के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और राजकोषीय नीति पर असर पड़ रहा है।

उर्वरक उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो सरकार को अतिरिक्त बजट आवंटन के लिए अपनी योजनाओं में संशोधन करना पड़ सकता है। कृषि नीति में इस तरह के बदलाव से खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों ही प्रभावित हो सकते हैं।