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भारत ने संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ की रिपोर्ट को खारिज किया, सत्यापन की मांग की
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट को 'अनुमान' बताते हुए खारिज कर दिया है, जिसमें देश के युवाओं की 'व्यंग्यात्मक राजनीतिक गतिविधियों' का जिक्र किया गया था। नई दिल्ली ने विशेषज्ञ से अप्रमाणित दावों के आधार पर निंदा करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करने की अपील की है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने यह बयान दिया। स्वरूप शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक गीना रोमेरो की रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए बोले कि इसमें भारतीय युवाओं के विरुद्ध प्रतिशोध या कलंक लगाने के बारे में दावे किए गए हैं। रोमेरो के अनुसार भारत में युवा मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय पर चर्चा करने के लिए प्रतिकूल परिणामों का सामना कर रहे हैं।
स्वरूप ने कहा कि रोमेरो की रिपोर्ट में "नाम न बताए गए सबमिशन" के हवाले दिए गए हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी के विरुद्ध गुमनाम और अप्रमाणित दावों पर आधारित कोई भी गंभीर आरोप साक्ष्य नहीं है, बल्कि यह केवल आरोप है।
भारत का रुख यह है कि किसी भी आलोचनात्मक टिप्पणी से पहले सूचना के स्रोतों को सत्यापित किया जाना चाहिए। स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों से अपेक्षा की कि वे अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय अधिक जिम्मेदारीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाएं।