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भारत ने संयुक्त राष्ट्र से मानवाधिकार तंत्र में राजनीतिकरण रोकने की अपील की
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र में चयनात्मकता और राजनीतिकरण से बचने का आग्रह किया है। देश ने आदिवासी लोगों के अधिकारों पर एक यूएन रिपोर्ट में स्वयं के संदर्भ पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र से यह माँग की है कि वह राजनीतिक पूर्वाग्रह से दूर रहे और सभी देशों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बहुपक्षीय मंच पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए यह बात कही है। देश का मानना है कि मानवाधिकार संबंधी नीतियों और रिपोर्टों में निष्पक्षता और समानता होनी चाहिए।
भारत ने आदिवासी जनों के अधिकारों के विषय पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट पर विशेष आपत्ति दर्ज की है। इस रिपोर्ट में भूमि, क्षेत्र और संसाधनों के सीमांकन, पंजीकरण और स्वामित्व से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं। भारत का कहना है कि रिपोर्ट में उसके संबंध में दिया गया संदर्भ अनुचित और पूर्वाग्रहपूर्ण है।
भारत के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, गैर-राजनीतिक और सामर्थ्य-आधारित होना चाहिए। देश ने इस बात पर जोर दिया है कि विकासशील राष्ट्रों को लक्ष्य बनाने की प्रवृत्ति से बचा जाना चाहिए। भारत ने अपनी आदिवासी नीतियों की वैधता और समावेशी दृष्टिकोण पर भी बल दिया है।