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भारत-चीन वार्ता: संरचनात्मक मतभेद बरकरार हैं, कहते हैं हू शिशेंग
चीन के प्रमुख रणनीतिक विशेषज्ञ हू शिशेंग का मानना है कि सीमा विवाद में तत्काल समाधान से अधिक महत्वपूर्ण स्थिरता को संस्थागत रूप देना है। शिशेंग के अनुसार भारत और चीन के बीच आधारभूत अंतर अभी विद्यमान हैं।
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भारत और चीन के बीच चल रही वार्ता में दोनों देशों के बीच के गहरे संरचनात्मक मतभेद अभी दूर नहीं हुए हैं, यह मत दक्षिण एशिया के प्रभावशाली चीनी रणनीतिक विश्लेषक हू शिशेंग का है। उनके विश्लेषण से संकेत मिलता है कि मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए लंबे समय की प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
हू शिशेंग के अनुसार, भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में किसी नाटकीय समझौते की तुलना में सीमावर्ती क्षेत्र में स्थिरता को संस्थागत ढांचे में ढालना अधिक तुरंत प्रभावी दृष्टिकोण है। यह दृष्टिकोण दोनों देशों के बीच विश्वास का वातावरण बनाने में मदद कर सकता है।
चीनी विश्लेषक का यह कथन इस बात को दर्शाता है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत और चीन को तत्काल राजनीतिक निर्णय लेने की बजाय व्यावहारिक उपायों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सीमा क्षेत्र में सैन्य नियंत्रण तंत्र को मजबूत करना और पारस्परिक समझदारी के सूत्र तैयार करना इस रणनीति के मुख्य तत्व हो सकते हैं।