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भारत का अमेरिका को संदेश: PERM कार्यक्रम में बदलाव साझा लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाता
भारत ने अमेरिका के PERM प्रोग्राम में किए जा रहे संशोधनों पर अपनी चिंता जताई है। भारतीय पक्ष का मानना है कि प्रतिभा की गतिशीलता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है।
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भारत ने सोमवार को अमेरिका के PERM (Permanent Employment) कार्यक्रम से संबंधित नीति बदलावों पर असंतोष व्यक्त किया। भारतीय सरकार का मत है कि इस तरह के कदम दोनों देशों के साझा आर्थिक उद्देश्यों को आगे नहीं बढ़ाते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कुशल कर्मचारियों की गतिशीलता भारत और अमेरिका दोनों की अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ती है। भारतीय विशेषज्ञ और पेशेवर अमेरिकी कंपनियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस तरह की नीतियां द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करती हैं।
भारत का मानना है कि PERM कार्यक्रम में प्रतिबंधात्मक नीतियां दोनों देशों के बीच तकनीकी और पेशेवर आदान-प्रदान में बाधा डालती हैं। ऐसे कदम अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभा प्रवाह को सीमित करते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
दोनों देश भविष्य में इस विषय पर आगे की बातचीत के लिए तैयार हैं। भारत का लक्ष्य ऐसी नीतियों की वकालत करना जारी रखना है जो पारस्परिक लाभ के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करें।