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दिवाली से पहले सरकार का बड़ा कदम, पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया गया
केंद्रीय सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली निर्यात ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जबकि डीजल पर कर बढ़ाया गया है। यह नई दर आने वाले दो सप्ताह के लिए प्रभावी की गई है।
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केंद्र सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को शून्य कर दिया है। यह निर्णय दिवाली के त्योहार से पहले लिया गया है और देश की तेल निर्यात नीति में बदलाव का संकेत देता है।
सरकार के इस कदम से पेट्रोल का निर्यात आसान हो जाएगा और संबंधित उद्योग को राहत मिलेगी। वहीं, दूसरी ओर डीजल पर किए गए कर में वृद्धि से सरकार का राजस्व संतुलित रहेगा। यह नीतिगत दृष्टिकोण निर्यात और घरेलू बाजार दोनों में संतुलन बनाने का प्रयास प्रतीत होता है।
सरकार द्वारा घोषित यह नई दर अगले दो सप्ताह के लिए लागू की गई है। इस अवधि के दौरान इसका प्रभाव बाजार और व्यापारियों पर देखा जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार इस अवधि के बाद स्थिति का आकलन करके आगे की नीति तय करेगी।
यह फैसला वैश्विक तेल बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया प्रतीत होता है। निर्यातकों के लिए यह कदम व्यापारिक सुविधा प्रदान करेगा, जबकि सरकार डीजल पर बढ़े कर से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करेगी।