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सरकार ने GDP अनुमानों का बचाव किया, कहा संशोधन डेटा से संबंधित है
भारतीय सांख्यिकी मंत्रालय ने बुधवार को आर्थिक वृद्धि के संशोधित अनुमानों के पीछे की कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि ये परिवर्तन जानबूझकर वृद्धि दर को बढ़ाने की कोशिश नहीं बल्कि बेहतर डेटा और नई अनुमान तकनीकों का प्रतिफलन हैं।
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सरकार द्वारा 2022-23 को आधार वर्ष मानकर जारी किए गए संशोधित जीडीपी आंकड़ों के दो दिन बाद सांख्यिकी मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को जारी किया। नई अनुमान श्रृंखला में उत्पादक मूल्य सूचकांक, बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक और अतिरिक्त प्रशासनिक डेटा को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने विस्तृत प्रश्नोत्तर के माध्यम से विभिन्न चिंताओं को संबोधित किया, जिनमें विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक अंतर्निहित मूल्य अवस्फीतिकर और खनन क्षेत्र में मौद्रिक एवं वास्तविक वृद्धि के बीच तीव्र अंतर शामिल हैं। साथ ही उत्पादन और व्यय पक्ष के अनुमानों के बीच सांख्यिकीय असंगति को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया गया।
भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान आर्थिक वर्ष की पहली तिमाही में संशोधित जीडीपी श्रृंखला के अनुसार वास्तविक रूप से 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। सांख्यिकी मंत्रालय ने जोर दिया कि इन संशोधनों का उद्देश्य विकास दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाना नहीं, बल्कि अधिक सटीक और पारदर्शी आर्थिक माप प्रदान करना है।