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केंद्र ने 1 अक्टूबर से कोयला संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने का आदेश दिया
बिजली मंत्रालय ने आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना के बीच विद्युत अधिनियम के आपातकालीन प्रावधानों का सहारा लिया है। कई संयंत्रों में कोयले के भंडार कम होने की स्थिति में यह कदम उठाया गया है।
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केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने 1 अक्टूबर से सभी कैप्टिव कोयला विद्युत संयंत्रों को अपनी पूरी क्षमता से संचालित करने का आदेश दिया है। यह निर्णय आने वाले महीनों में देश में विद्युत की मांग में प्रत्याशित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मंत्रालय ने इस आदेश को जारी करने के लिए विद्युत अधिनियम के आपातकालीन प्रावधानों का इस्तेमाल किया है। देश के विभिन्न बिजली संयंत्रों में कोयले के स्टॉक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिससे बिजली की आपूर्ति को लेकर संभावित समस्या का आशंका था।
इस निर्देश के तहत सभी निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कैप्टिव कोयला संयंत्रों को अपनी संयंत्र क्षमता का पूरा उपयोग करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करने और बिजली संकट से बचने के लिए आवश्यक है।
आने वाले मौसम में तापमान में वृद्धि और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण बिजली की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। ऐसी परिस्थितियों में बिजली उत्पादन क्षमता को अधिकतम करना जरूरी माना गया है।