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आतंकवाद और नाटकबाजी से कर्ज नहीं चुकाए जा सकते: भारत ने पाकिस्तान को यूएन में खरी-खोटी सुनाई
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि देश के मौजूदा दृष्टिकोण से पाकिस्तान के आर्थिक संकट का समाधान नहीं होगा।
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जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध आरोपों का तीखा प्रतिवाद किया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य क्षितिज त्यागी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और ड्रामेबाजी के माध्यम से न तो अंतर्राष्ट्रीय कर्ज चुकाया जा सकता है और न ही आर्थिक संकट से निकला जा सकता है।
त्यागी ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि मानवाधिकार परिषद का मंच गंभीर मुद्दों पर बहस के लिए है, न कि राजनीतिक प्रचार के लिए। उन्होंने रेखांकित किया कि पाकिस्तान को अपने आर्थिक समस्याओं का सामना करने के लिए वास्तविक और जिम्मेदारीपूर्ण नीतियां अपनानी होंगी।
भारतीय राजनयिक के इस बयान का संदर्भ पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से बार-बार कर्ज लेने की परिस्थिति से है। त्यागी का कथन यह संदेश देता है कि पाकिस्तान को अपनी समस्याओं को हल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अन्य देशों के विरुद्ध बयानबाजी की बजाय घरेलू नीतियों में सुधार करना चाहिए।
यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच जारी तनाव और मानवाधिकार परिषद में होने वाली नियमित राजनीतिक वार्ता का हिस्सा है। भारत ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि सार्थक आर्थिक सुधार के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है।