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बाढ़ नियंत्रण के लिए वन क्षेत्रों में ड्रेजिंग के नए नियम जारी
केंद्र सरकार ने वन क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से नदियों की ड्रेजिंग की अनुमति देने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इससे बाढ़ को नियंत्रित करने और नदी पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में मदद मिलेगी।
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केंद्र सरकार ने वन क्षेत्रों में नदियों की ड्रेजिंग के लिए नए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत, वैज्ञानिक तरीके से नियोजित ड्रेजिंग परियोजनाओं को अब "गैर-वन उद्देश्य" के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा। इससे बाढ़ नियंत्रण और नदी संरक्षण के कार्यों को तेजी से अमल में लाया जा सकेगा।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, योग्य ड्रेजिंग परियोजनाएं वन स्वीकृति, मुआवजे के रूप में पुनः वृक्षारोपण और निवल वर्तमान मूल्य (एनपीवी) भुगतान की आवश्यकताओं से छूट पाएंगी। यह निर्णय बाढ़ प्रबंधन और नदी पुनरुद्धार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों की ड्रेजिंग से जलभराव कम होता है और नदियों की पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार होता है। नए दिशानिर्देशों में वैज्ञानिक योजना और पर्यावरणीय सुरक्षा के मानदंड बनाए गए हैं ताकि वन संरक्षण के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण भी सुनिश्चित हो सके।
यह नीति परिवर्तन उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां बाढ़ एक आवर्ती समस्या है। सरकार का मानना है कि इस कदम से जलवायु परिवर्तन के दौर में बाढ़ के खतरे को कम करने में सहायता मिलेगी और नदियों की प्राकृतिक संरचना को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।