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प्रवासी भारतीयों के लिए संपत्ति खरीद में टीडीएस नियम आसान
अक्टूबर से लागू होने वाले नए संशोधन में निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों को टीडीएस अनुपालन के लिए अलग से टैन लेना अनिवार्य नहीं रह गया है। यह कदम प्रवासी भारतीयों की संपत्ति खरीद प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
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केंद्र सरकार ने अक्टूबर से प्रभावी होने वाले नए कर नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जो प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए संपत्ति खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाएंगे। नए संशोधन के तहत निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) को स्रोत पर कर (टीडीएस) की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए अलग से टैक्स एकाउंट नंबर (टैन) प्राप्त करना अनिवार्य नहीं रह गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह संशोधन संपत्ति क्षेत्र में प्रशासनिक बोझ को काफी हद तक कम करेगा। पहले अगर कोई निवासी व्यक्ति या एचयूएफ संपत्ति बेचते समय टीडीएस काटते थे तो उन्हें आयकर कानून के तहत टैन लेना पड़ता था। नए नियमों में यह बाध्यता समाप्त कर दी गई है।
यह कदम खासतौर पर उन एनआरआई के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत में संपत्ति बेचना चाहते हैं। सरलीकृत प्रक्रिया से संपत्ति लेनदेन में तेजी आने की उम्मीद है और कागजी कार्रवाई में भी कमी आएगी। आयकर विभाग ने इस संशोधन को पारदर्शिता और कर अनुपालन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू किया है।
विभाग का मानना है कि यह परिवर्तन आम नागरिकों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के लिए संपत्ति संबंधी लेनदेन को व्यावहारिक बनाएगा। नई व्यवस्था में प्रभावी ढंग से टीडीएस की वसूली और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया अपरिवर्तित रहेगी, केवल टैन आवश्यकता हटाई गई है।