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यूपीआई की लागत साझा करने का बेहतर तरीका खोजना जरूरी
डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई की वित्तीय जिम्मेदारियों को व्यापक आधार पर बांटने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।
LSN India ·

यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई है, लेकिन इस प्रणाली के संचालन की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई के खर्च को वर्तमान तरीके से केंद्रीभूत रखने के बजाय अधिक लोगों और संस्थानों के बीच साझा किया जाना चाहिए।
वर्तमान व्यवस्था में यूपीआई के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कुछ संस्थानों पर केंद्रित है। इससे न केवल असमान बोझ पड़ता है, बल्कि पूरी प्रणाली की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। लागत को अधिक व्यापक आधार पर बांटने से विभिन्न भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों को भी समान जिम्मेदारी निभानी होगी।
ऐसा किया जाने से डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने वाले मौजूदा प्रोत्साहनों में कोई कमी नहीं आएगी। बल्कि, एक संतुलित लागत वितरण मॉडल से प्रणाली की दक्षता बेहतर होगी और इसे और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।
नीति निर्माताओं को इस दिशा में आने वाले समय में उचित संरचना तैयार करने की जरूरत है ताकि यूपीआई जैसी महत्वपूर्ण प्रणाली दीर्घकाल में टिकाऊ और प्रभावी बनी रहे। एक व्यापक वित्त पोषण ढांचा तैयार करने से न केवल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि वित्तीय समावेशन का लक्ष्य भी तेजी से पूरा हो सकेगा।