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पराली को जलाने की जगह व्यावसायिक संसाधन में बदलने की कोशिश
भारत में किसान अपनी फसल कटने के बाद बची पराली को जलाते हैं जिससे प्रदूषण की समस्या बढ़ती है। अब सरकार और उद्योग इस समस्या को आर्थिक अवसर में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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भारत में प्रतिवर्ष लाखों टन पराली जलाई जाती है, जिससे वायु प्रदूषण का संकट गहराता है। विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में यह समस्या अधिक गंभीर है। अब नीति निर्माता और कृषि वैज्ञानिक इस समस्या का समाधान एक व्यावहारिक दृष्टिकोण से खोज रहे हैं।
पराली से जैव ईंधन बनाना भारत के लिए एक संभावित समाधान माना जा रहा है। इसके अलावा, पराली का उपयोग कृषि आधारित उद्योगों में कच्चे माल के रूप में भी किया जा सकता है। विभिन्न स्टार्टअप और कंपनियां इस दिशा में प्रयोग कर रही हैं।
खाद्य उद्योग की एक उभरती शाखा पराली से मशरूम की खेती भी शुरू कर रही है। यह विधि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। वहीं, सरकार भी पराली को संपदा में रूपांतरित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही ढांचा और निवेश उपलब्ध हो तो पराली प्रबंधन भारत के लिए एक लाभकारी व्यावसायिक अवसर साबित हो सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।