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अवैध नजरबंदी के आरोपों पर सरकार की कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की बेंच ने सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है। सरकार का कहना है कि अवैध नजरबंदी की घटनाओं से निपटने के लिए कार्रवाई तैयार है, लेकिन इसमें कुछ सुधार की जरूरत है।
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सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की बेंच ने सोमवार को अवैध नजरबंदी के आरोपों से संबंधित मामले में सरकार को अतिरिक्त समय प्रदान किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सरकार को 15 अक्टूबर 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत के समक्ष सरकार ने तर्क दिया कि नजरबंदी की घटनाओं से निपटने के लिए एक व्यापक कार्रवाई योजना तैयार की गई है। हालांकि, सरकारी पक्ष ने स्वीकार किया कि प्रस्तावित कार्रवाई में कुछ बारीकियों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
यह मामला सार्वजनिक हित के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें नागरिक स्वतंत्रता और कानूनी संरक्षण से संबंधित गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। अदालत ने निर्धारित समय सीमा में सरकार से एक विस्तृत और व्यवहारिक कार्ययोजना की अपेक्षा की है।
मामला अगली सुनवाई के लिए सूची में बना रहेगा, जिसमें सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की विस्तार से परीक्षा की जाएगी।