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हार्मुज़ जलसंकट के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की चुनौती

भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल समुद्री क्षमता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि देश को बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा।

LSN India · 10 September 2026

हार्मुज़ जलसंकट के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की चुनौती

फारस की खाड़ी में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं उभर रही हैं। इस क्षेत्र से भारत अपनी तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त करता है, लेकिन हार्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ती तनातनी भारत की खाद्य सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।

नीति विश्लेषकों का तर्क है कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए अपनी सामरिक स्वायत्तता को मजबूत करना चाहिए। समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक क्षमता विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेले पर्याप्त नहीं है। देश को अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाना होगा और अन्य स्रोतों से आयात बढ़ाना होगा।

भारत को अपनी नीति में तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान देना चाहिए: नई तेल आपूर्ति के स्रोतों की खोज, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को तेजी से बढ़ाना, और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को समझदारीपूर्वक संचालित करना। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को गहरा करना भी आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मत है कि भारत की समृद्धि और विकास के लिए ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक पहलुओं का एक संयुक्त प्रयास होना चाहिए। इसी के जरिए भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों का भी समाधान निकाल सकता है।