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भारत के 40 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को अभी किसान आईडी से जोड़ना बाकी
कृषि मंत्रालय के अनुसार, देश के कुल बुवाई क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अभी किसान पहचान प्रणाली से जुड़ा नहीं है। साथ ही, अधिकांश राज्यों ने खेतिहर वर्गीकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया अभी तैयार नहीं की है।
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भारतीय कृषि क्षेत्र की डिजिटलीकरण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चुनौती सामने आई है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि देश के शुद्ध बुवाई क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अभी तक किसान आईडी प्रणाली से जुड़ा नहीं है।
किसान पहचान प्रणाली का उद्देश्य प्रत्येक किसान को एक अद्वितीय डिजिटल पहचान प्रदान करना है, जो सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और अन्य कृषि सहायता तक पहुंचना आसान बनाता है। हालांकि, यह महत्वाकांक्षी पहल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुई है।
मंत्रालय की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अधिकांश राज्यों ने विभिन्न खेतिहर श्रेणियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया है। ये मानदंड किसान, जोतदार और अन्य कृषि कार्यकर्ताओं को सटीक रूप से वर्गीकृत करने के लिए आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसान आईडी प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को तेजी से कदम उठाने होंगे। इस प्रणाली के पूर्ण कार्यान्वयन से कृषि प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुंचेगी। देश के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे को तुरंत सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।