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भारत में बुजुर्ग आबादी का संकट अमेरिका से तेज़ होगा: मूडीज़
मूडीज़ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत महज़ 16 सालों में बुजुर्ग से अति-बुजुर्ग समाज में तब्दील हो जाएगा। उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं को कम आय पर ही पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ झेलना पड़ेगा।
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भारत जनसांख्यिकीय परिवर्तन की तेज़ी से गुज़र रहा है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज़ की ताज़ा विश्लेषण में कहा गया है कि भारत अगले डेढ़ दशक में बुजुर्ग समाज से अति-बुजुर्ग समाज में तब्दील हो जाएगा। यह परिवर्तन अमेरिका और इंडोनेशिया में हुए बदलाव से कहीं अधिक तेज़ी से होगा।
इस तेज़ जनसांख्यिकीय बदलाव के साथ भारत के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी हो रही है। पेंशन योजनाएं और स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च में अभूतपूर्व वृद्धि की आशंका है। मूडीज़ की रिपोर्ट के अनुसार, उदीयमान अर्थव्यवस्थाएं इस संकट को विकसित देशों की तुलना में कम आय के स्तर पर ही झेलने के लिए मजबूर होंगी।
इस स्थिति से जुड़ी आर्थिक चिंताएं अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को प्रभावित कर सकती हैं। सामाजिक कल्याण योजनाओं के विस्तार के लिए भारत को अपनी वित्तीय नीतियों में महत्वपूर्ण सुधार करने होंगे। साथ ही, स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को और मजबूत बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस जनसांख्यिकीय संक्रमण के लिए सुनियोजित नीतियां और रणनीति तैयार करनी होंगी। सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करना और कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाना इस चुनौती का समाधान हो सकता है। इन कदमों के बिना, भारत की आर्थिक प्रगति पर गंभीर असर पड़ने का खतरा है।