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भारत में कुष्ठ रोग के 3,832 बच्चों का निदान, 2027 तक संचरण रोकने का लक्ष्य
देश में पिछले वर्ष कुष्ठ रोग से 3,832 बच्चों का निदान किया गया है। चिंताजनक बात यह है कि 37 बच्चों में रोग के निदान के समय ही दूसरी डिग्री की विकलांगता देखी गई, जो देरी से पहचान और संचरण जारी रहने के सवाल उठाता है।
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भारत सरकार ने 2027 तक कुष्ठ रोग के संचरण को रोकने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, देश में कुष्ठ रोग की पहचान में विलंब की समस्या लगातार बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बचपन में कुष्ठ रोग की पहचान न हो पाने से बीमारी के संचरण में वृद्धि हो रही है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में बच्चों में रोग की उन्नत अवस्था में पता चलना राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जांच-पड़ताल के तंत्र में खामियों को दर्शाता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों तक आसान पहुंच न होना मुख्य कारण हैं।
देश के स्वास्थ्य विभाग ने कुष्ठ रोग को समाप्त करने के लिए व्यापक कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना, समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाना और संदिग्ध रोगियों की जांच में तेजी लाना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि शीघ्र निदान और उचित चिकित्सा से रोग के प्रसार को रोका जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूल परीक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करें और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दें ताकि बच्चों में रोग की पहचान जल्दी हो सके। 2027 तक संचरण को रोकने के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी हितधारकों से समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।