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भारत में बाल विवाह की समस्या गंभीर, हर पांच में एक नाबालिग प्रभावित
भारत में बाल विवाह की दर में कमी आई है, लेकिन लाखों नाबालिक लड़कियां अभी भी कानूनी उम्र से पहले विवाह के बंधन में बंध जाती हैं। विश्व स्तर पर यह समस्या और भी व्यापक है।
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भारत में बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है, हालांकि इसकी दर में पिछले वर्षों में कमी देखी गई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, देश में हर पांच नाबालिकों में से एक की शादी 18 साल की कानूनी आयु से पहले कर दी जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों और कुछ विशेष राज्यों में यह प्रथा अभी भी व्यापक रूप से प्रचलित है। सामाजिक-आर्थिक कारणों, परंपरागत मान्यताओं और शिक्षा की कमी के कारण बाल विवाह की घटनाएं जारी हैं। स्थानीय समुदाय और प्रशासन के स्तर पर इस प्रथा को खत्म करने के प्रयास चल रहे हैं।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति और चिंताजनक है। विश्व भर में हर तीन सेकंड में एक लड़की का बाल विवाह होता है, जो इस समस्या के विस्तार को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बाल विवाह को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।
भारत सरकार और गैर-सरकारी संगठन इस प्रथा को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान, कानूनी सहायता और शिक्षा कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों की शिक्षा में निवेश और आर्थिक सशक्तिकरण से इस समस्या में कमी आ सकती है।