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भारतीय कंपनियों की वृद्धि का मुख्य माध्यम बने एम एंड ए सौदे
क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर तेजी से विकास के लिए विलय और अधिग्रहण की रणनीति अपना रहा है। वित्त वर्ष 2017 के बाद से सालाना सौदों की संख्या दोगुनी हो गई है।
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भारतीय कंपनियां अब अपनी बढ़ोतरी को तेज करने के लिए विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) को एक मुख्य रणनीति के तौर पर अपना रही हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के विश्लेषण से पता चलता है कि इस क्षेत्र में सौदों की गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वर्ष 2017 के बाद से सालाना आधार पर एम एंड ए सौदों की संख्या दोगुनी हो गई है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि कंपनियां आंतरिक विकास की जगह बाहरी विकास की रणनीति को प्राथमिकता दे रही हैं। यह बदलाव भारतीय कॉर्पोरेट जगत की परिपक्वता और आत्मविश्वास का संकेत है।
क्रिसिल के अनुसार, कंपनियां अपने ऋण और पूंजीगत व्यय की तीव्रता को कम करते हुए विलय और अधिग्रहण के जरिए विस्तार कर रही हैं। इसका मतलब यह है कि कंपनियां अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करते हुए विकास के नए रास्ते तलाश रही हैं।
इस रणनीति से कंपनियों को बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने, नई प्रौद्योगिकी हासिल करने और नए ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में एम एंड ए गतिविधि भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।