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भारत जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली क्यों खरीद रहा है?
भारतीय सेना में जेवलिन मिसाइल प्रणाली का समावेश लगभग 15 साल की लंबी प्रक्रिया के बाद संभव हुआ। तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहली असहमति इस देरी का मुख्य कारण रही।
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भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की रणनीति में जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली का अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय सेना की टैंक भेदी क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करेगी।
जेवलिन मिसाइल प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने की प्रक्रिया काफी जटिल रही है। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तकनीकी हस्तांतरण और भारत में इसके स्थानीय उत्पादन को लेकर गंभीर मतभेद थे, जिसके कारण यह परियोजना लगभी डेढ़ दशक तक लंबित रही।
जेवलिन प्रणाली की विशेषताओं में उन्नत निर्देशन प्रणाली, लंबी मारक क्षमता और उच्च सटीकता शामिल है। यह हल्के वजन की होने के साथ ही अत्यधिक प्रभावी है और सैनिकों द्वारा आसानी से संचालित की जा सकती है। आधुनिक युद्ध परिदृश्य में इसकी मौजूदगी भारतीय सेना को प्रमुख लाभ प्रदान करेगी।
इस अधिग्रहण से न केवल भारत की सैन्य तैयारियां सुदृढ़ होंगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति को और भी मजबूत करेगा।