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यूपीआई पर नया शुल्क ढांचा: शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश पर असर
भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट ढांचा जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। पूंजी बाजार लेनदेन समेत कुछ भुगतानों पर अब शुल्क लगेगा।
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भारत के नीति निर्माताओं ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से किए जाने वाले लेनदेन के लिए एक व्यापक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नीति को मंजूरी दे दी है। यह नया ढांचा आने वाले वर्ष के मध्य में प्रभाव में आएगा और शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड तथा अन्य पूंजी बाजार संबंधी भुगतानों पर विभेदित शुल्क लागू करेगा।
नई नीति के अनुसार, सामान्य उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान पूर्ववत मुक्त रहेंगे। तथापि, 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के कुछ मर्चेंट लेनदेन पर अब एमडीआर लागू होगा। यह परिवर्तन खुदरा व्यापार में डिजिटल भुगतान को प्रभावित कर सकता है।
शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश संबंधी लेनदेन के लिए अलग एमडीआर दरें निर्धारित की गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पूंजी बाजार में छोटे निवेशकों की भागीदारी को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ने से लेनदेन खर्च में वृद्धि हो सकती है।
यह नीति परिवर्तन भारतीय डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जहां यूपीआई लाखों नागरिकों के लिए पसंदीदा भुगतान माध्यम बन गया है। सरकार का यह कदम विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के विस्तार को संतुलित करते हुए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने का प्रयास माना जा रहा है।