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समुद्र मंथन योजना: सरकार गहरे समुद्र में तेल खोज में जोखिम साझा करेगी
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना के संचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस योजना के तहत सरकार तेल और गैस कंपनियों के साथ गहरे समुद्र में अन्वेषण के जोखिम और लागत को साझा करेगी।
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भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने समुद्र मंथन कार्यक्रम के लिए संचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसका उद्देश्य देश के गहरे और अत्यंत गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल व गैस अन्वेषण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना है। इस योजना के माध्यम से सरकार उच्च जोखिम वाली ड्रिलिंग पहलों की लागत में भाग लेगी, समुद्री बेसिनों का भूकंपीय सर्वेक्षण करेगी और साझा उत्पादन सुविधाओं के निर्माण में सहायता प्रदान करेगी।
इस योजना को वर्ष 2030-31 तक संचालित किया जाएगा, जिसमें वर्ष 2026-27 को तैयारी का वर्ष माना गया है और 2027-28 से 2030-31 तक का अवधि प्रथम चरण के रूप में चिन्हित की गई है। गहरे समुद्र में ड्रिलिंग की अत्यधिक लागत और भूवैज्ञानिक अनिश्चितता के कारण इन क्षेत्रों में निजी निवेश में भारी कमी आई है, जिसे दूर करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने दिशानिर्देशों की प्रस्तावना में इस योजना को 'हाल के समय में किया गया सबसे महत्वाकांक्षी तेल और गैस अपस्ट्रीम हस्तक्षेप' कहा है। यह पहल आयातित हाइड्रोकार्बन पर भारत की भारी निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखती है और देश के ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।