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कपास उत्पादन में गिरावट के बीच केंद्र आयात शुल्क मुक्त रखने पर विचार
भारत के कपास उत्पादन में 12-18 प्रतिशत की गिरावट की आशंका से केंद्र सरकार शुल्क-मुक्त आयात को दिसंबर तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे देश में कपास की आपूर्ति पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
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भारत के कपास उत्पादन में तेजी से गिरावट आने की स्थिति में केंद्र सरकार विदेशी कपास के आयात पर शुल्क में छूट बढ़ाने की तैयारी कर रही है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार आने वाले साल 2026-27 में देश का कपास उत्पादन लगभग 29 मिलियन गांठों तक सीमित रह सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है।
इस उत्पादन में भारी कमी के कारण घरेलू कपास बाजार में आपूर्ति की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यह स्थिति कपास पर निर्भर वस्त्र उद्योग और अन्य संबंधित क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए आयातित कपास पर प्रशुल्क में छूट देने के विकल्प पर गौर कर रही है।
शुल्क-मुक्त आयात को दिसंबर तक बढ़ाने की योजना के तहत विदेशी कपास को आसानी से भारत में लाया जा सकेगा। इससे देश में कपास की कमी को पूरा करने और बाजार में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी। ऐसा कदम वस्त्र उद्योग को निरंतर कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों के चलते कपास के पौधों की उपज में गिरावट देखी जा रही है। यह स्थिति भारतीय कपास किसानों और वस्त्र निर्यातकों दोनों के लिए चिंताजनक है। सरकार के इस कदम को अल्पकालीन राहत प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है।