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भारत द्विपक्षीय संधियों में सर्वाधिक पक्षीकृत राष्ट्र नियम पुनः लागू करने पर विचार
निवेश विवादों से जुड़ी चिंताओं के बाद भारत ने 2016 में अपने मॉडल निवेश संधि से एमएफएन खंड हटाया था। अब सीमित रूप में इस नियम को दोबारा शामिल करने की रिपोर्ट सामने आ रही है।
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भारत द्विपक्षीय निवेश संधियों (बीआईटी) में सर्वाधिक पक्षीकृत राष्ट्र (एमएफएन) नियम को सीमित आधार पर पुनः शामिल करने पर विचार कर रहा है। यह कदम निवेश संरक्षण को लेकर नीति में आए बदलाव को दर्शाता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस व्यापक खंड के सीमित संस्करण को लागू करना चाहती है।
भारत ने 2016 में अपने मॉडल बिलेटरल इनवेस्टमेंट ट्रीटी से एमएफएन क्लॉज को हटाया था। यह निर्णय एक महत्वपूर्ण निवेश विवाद के बाद लिया गया था जिसमें इस खंड के व्यापक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं उठी थीं। एमएफएन खंड से विदेशी निवेशकों को अन्य देशों के साथ दी गई बेहतर शर्तों का लाभ उठाने की सुविधा मिलती है।
इस नीति परिवर्तन का मतलब है कि भारत निवेश संरक्षण और अपनी नियामक स्वतंत्रता के बीच संतुलन ढूंढने का प्रयास कर रहा है। सीमित एमएफएन नियम अधिक लचीला दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है जो निवेशकों की चिंताओं को संबोधित करते हुए भारत की संप्रभुता की रक्षा भी करे।
यह कदम भारत की बहुराष्ट्रीय निवेश संधियों की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। नई पद्धति से भारत अपने विदेशी निवेश आकर्षण लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए निवेश विवादों में अपने जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहा है।