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विदेशी पूंजी पलायन से जूझती सरकार, कर राहत पर विचार
भारत से विदेशी निवेश की तेजी से निकासी के बीच सरकार दीर्घकालीन पूंजिगत लाभ कर और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स में छूट देने पर विचार कर रही है। नीति निर्माताओं का मानना है कि कर में कमी से पलायन को रोका जा सकता है।
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भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों के बड़े पैमाने पर पैसे निकालने की समस्या से जूझती सरकार अब कराधान नीति में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रही है। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच इस बात की चर्चा बढ़ रही है कि क्या दीर्घकालीन पूंजिगत लाभ कर (एलटीसीजी) और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में कमी से विदेशी पूंजी को वापस लाया जा सकता है।
हाल के महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार भारतीय बाजारों से धन निकाल रहे हैं। इस रुझान से भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार के संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि कर संरचना में संशोधन विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में निवेश जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। अन्य देशों की तुलना में भारत की कर दरें अधिक हो सकती हैं, जिससे निवेशक अन्य बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। इस संदर्भ में कर नीति को प्रतिस्पर्धी बनाने की बातचीत तेज हुई है।
सरकार के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि कर राजस्व में कोई भी कमी बजट को प्रभावित कर सकती है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले आर्थिक प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। आने वाले सप्ताहों में इस संबंध में सरकार की ओर से कोई घोषणा की जा सकती है।