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भारत को सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की जरूरत: विशेषज्ञ
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत को एक मजबूत सैन्य-औद्योगिक परिसर बनाना होगा, अन्यथा भविष्य में सीमित विकल्प रह जाएंगे।
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भारत के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश को अपनी सैन्य क्षमताओं को स्वावलंबी बनाने के लिए एक सुदृढ़ सैन्य-औद्योगिक परिसर की स्थापना अत्यावश्यक है। क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच, विशेषज्ञ मानते हैं कि आयातित रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता भारत की कूटनीतिक और सामरिक स्वतंत्रता को सीमित कर सकती है।
आंतरिक सैन्य-औद्योगिक क्षमता विकसित करने के लिए सरकार को निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और रक्षा मंत्रालय के बीच समन्वय बढ़ाना होगा। इसके अलावा, उन्नत तकनीकों में निवेश और कुशल जनशक्ति का विकास भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों पर निर्भर रहता है, तो भविष्य में संकट की स्थिति में उसके पास सीमित विकल्प रह जाएंगे। एक मजबूत स्वदेशी सैन्य-औद्योगिक आधार न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।
विশेषज्ञों का यह विचार इस वर्ष के रक्षा नीति प्रस्तावों में भी प्रतिबिंबित हो रहा है, जहां सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में अधिक ध्यान दे रही है।