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भारत को जोखिम भरी दुनिया में खुलेपन से आगे बढ़ना चाहिए: मिश्रा
भारत के शीर्ष नीति निर्माता पीके मिश्रा का मानना है कि देश को आर्थिक सुरक्षा के साथ अपनी कमजोरियों को सीमित करते हुए वैश्विक व्यापार में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
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भारत को एक जोखिम-भरी वैश्विक आर्थिक परिस्थिति में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विमुखतावाद की नीति नहीं बल्कि सुचिंतित खुलेपन का रास्ता अपनाना चाहिए। यह विचार शीर्ष नीति सलाहकार पीके मिश्रा द्वारा व्यक्त किए गए हैं, जिन्होंने भारत की आर्थिक रणनीति पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
मिश्रा के अनुसार, भारत को ऊर्जा सुरक्षा, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र और विविध व्यापार संबंधों को बनाए रखते हुए अपनी कमजोरियों को सीमित करने का संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि लचीलेपन की लागत को वहन करना आर्थिक शक्ति बनाए रखने के लिए जरूरी है।
वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में कई देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्वावलंबी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मिश्रा का संदेश यह है कि भारत को इस प्रवृत्ति के विरुद्ध जाकर बुद्धिमानीपूर्ण रूप से अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। यह दृष्टिकोण भारत को वैश्विक बाजार में अपनी प्रतিस्पर्धी स्थिति बनाए रखने में सहायता कर सकता है।
विशेषज्ञों का विचार है कि इस संतुलित दृष्टिकोण से भारत दीर्घकालीन आर्थिक विकास और राजनीतिक स्वतंत्रता दोनों को सुनिश्चित कर सकता है। मिश्रा का यह तर्क भारत की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।