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भारत के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चिंताजनक 'सुपर' एल नीनो की तैयारी जरूरी
वैज्ञानिकों और पारिस्थितिकविदों का मानना है कि एल नीनो से भारत की प्राकृतिक व्यवस्थाओं को गंभीर नुकसान का खतरा है। वे नीति निर्माताओं से आने वाले संकट से निपटने के लिए तत्काल अध्ययन और तैयारी की मांग कर रहे हैं।
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भारत के पारिस्थितिकविदों और जलवायु वैज्ञानिकों ने सरकार और शोध संस्थानों को एल नीनो की आसन्न घटना के व्यापक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए आगाह किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार आने वाला एल नीनो असाधारण रूप से शक्तिशाली हो सकता है, जिसे 'सुपर' एल नीनो की संज्ञा दी जा रही है। यह जलवायु प्रणाली भारतीय उपमहाद्वेश के विभिन्न प्राकृतिक तंत्रों पर सुदूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
एल नीनो की घटना के दौरान भारत में मानसून के पैटर्न में बदलाव, बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा देखी जाती है। इससे कृषि उत्पादन, जलीय संसाधन प्रबंधन और वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 'सुपर' एल नीनो की स्थिति में ये प्रभाव अधिक विनाशकारी हो सकते हैं।
नीति निर्माताओं और वैज्ञानिकों का तर्क है कि इस संभावित संकट से निपटने के लिए व्यापक अनुसंधान और सुव्यवस्थित रणनीति अपरिहार्य है। भारतीय कृषि, मत्स्य पालन, जल प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्रों में तुरंत सुधारात्मक उपाय अपनाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी हितधारकों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।