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विमानन क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक पर जोर, सरकार-निजी क्षेत्र में समन्वय की अपील
रक्षा मंत्री ने विमानन उद्योग में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए स्वदेशी तकनीकों के विकास पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठन के रूप में देखा जाना चाहिए।
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रक्षा मंत्री ने विमानन क्षेत्र में राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में घरेलू तकनीक विकास की वकालत की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय विमानन उद्योग को अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना होगा ताकि बाहरी निर्भरता को कम किया जा सके।
मंत्री के अनुसार, सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच एक स्वस्थ साझेदारी विमानन क्षेत्र के विकास के लिए अपरिहार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों खंडों को एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करना चाहिए, न कि प्रतिस्पर्धी के रूप में। इस दृष्टिकोण से सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
विमानन क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी संस्थानों के बीच समन्वय से न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी वृद्धि होगी। मंत्री का मानना है कि इस सहयोगी मॉडल से भारत अपने विमान उद्योग को वैश्विक मानकों तक ले जा सकता है।
इस सुझाव से विमानन क्षेत्र में निवेश और तकनीकी विकास को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत विश्व के प्रमुख विमानन केंद्रों में से एक बन सकेगा।