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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में कौशल विकास जरूरी: मंडाविया
केंद्रीय श्रम मंत्री मंसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियां कर्मचारियों के कौशल को निरंतर विकसित करने की मांग करती हैं। उन्होंने औद्योगिक संबंधों की नई व्यवस्था के लिए आधुनिक श्रम कानूनों की भूमिका को रेखांकित किया।
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भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक संबंध एवं श्रम सम्मेलन में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मंसुख मंडाविया ने कहा कि नई प्रौद्योगिकियां कार्यस्थल को तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि इस परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने के लिए कर्मचारियों के कौशल में निरंतर सुधार अपरिहार्य है।
मंडाविया ने कहा कि आने वाले समय में ऐसी औद्योगिक संबंध व्यवस्था की जरूरत है जो उत्पादकता, कर्मचारी कौशल, सुरक्षा और भागीदारी को संतुलित करे। उन्होंने मालिकों और कर्मचारियों के बीच सार्थक संवाद को विशेष महत्व दिया, खासकर जब प्रौद्योगिकी कार्य के क्षेत्र को नया रूप दे रही है।
श्रम मंत्री ने नए श्रम संहिताओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये संहिताएं आधुनिक, विकास-अनुकूल ढांचा प्रदान करती हैं। साथ ही, ये व्यावसायिक अनुपालन को सरल बनाते हुए कर्मचारियों के संरक्षण को मजबूत करती हैं।
मंडाविया ने सामाजिक सुरक्षा कवरेज को विस्तृत करने और एक समावेशी श्रम पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दिया जो औपचारिक और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों तक पहुंचे। उन्होंने सरकार, उद्योग और श्रमिक संगठनों से मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि भविष्य के लिए तैयार एक श्रम ढांचा विकसित किया जा सके।