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भारत को पेटेंट से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादों पर फोकस करना होगा: डेनमार्क
डेनमार्क के राजदूत का कहना है कि पेटेंट फाइलिंग में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद अब भारत को बौद्धिक संपत्ति को व्यावहारिक उत्पादों और व्यावसायिक समाधानों में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।
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भारत की बौद्धिक संपत्ति नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत है। डेनमार्क के राजनयिक प्रतिनिधित्व का मानना है कि देश को पेटेंट दाखिल करने की संख्या बढ़ाने के अलावा, इन आविष्कारों को वास्तविक बाजार में लाने पर भी समान ध्यान देना चाहिए। हाल के वर्षों में भारत में पेटेंट फाइलिंग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लेकिन इनमें से अधिकांश प्रौद्योगिकियां व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं बन पाई हैं।
डेनमार्क की ओर से दिए गए सुझावों में छोटे और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बेहतर सहायता प्रदान करना शामिल है। ये व्यावसायिक इकाइयां भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें अपने पेटेंट किए गए विचारों को बाजार में लाने के लिए पर्याप्त तकनीकी और वित्तीय सहायता नहीं मिलती है। विकसित राष्ट्रों में यह प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित है।
भारत के लिए यह संदेश स्पष्ट है कि बौद्धिक संपत्ति का वास्तविक मूल्य तब होता है जब उसे व्यावहारिक उत्पादों और सेवाओं में परिणत किया जाए। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना होगा जो आविष्कारकों और छोटे उद्यमों को अपनी तकनीकों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में सक्षम बनाए। इस दिशा में प्रगति से न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान मिलेगा, बल्कि विश्व बाजार में भी भारतीय नवाचार की उपस्थिति बढ़ेगी।