LSN News › India

Technology · India Bureau

भारत को एआई के संस्थागत जोखिमों का आकलन करने की जरूरत: विशेषज्ञ

अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकें संचालन और भू-राजनीतिक दृष्टि से बढ़ता जोखिम बन रही हैं। भारत को मजबूत एआई मूल्यांकन और निरीक्षण व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

LSN India · 23 August 2026

भारत को एआई के संस्थागत जोखिमों का आकलन करने की जरूरत: विशेषज्ञ

भारत सहित वैश्विक समुदाय को अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों के बढ़ते जोखिमों का मूल्यांकन करने के लिए मजबूत ढांचा तैयार करने की तुरंत आवश्यकता है। एआई प्रणालियाँ अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं रह गई हैं, बल्कि देश की संस्थागत स्थिरता और सुरक्षा के लिए व्यवस्थागत जोखिम पेश कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती एआई तकनीकें भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, वित्तीय प्रणालियों और सार्वजनिक संस्थानों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। साथ ही, ये तकनीकें भू-राजनीतिक स्तर पर भी अनपेक्षित परिणाम दे सकती हैं। इसलिए देश को इन जोखिमों से निपटने के लिए सुसंगत नीति और तकनीकी रणनीति बनानी चाहिए।

भारत के लिए यह समय एआई प्रौद्योगिकी के प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन करने का है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर एआई सिस्टम के कामकाज की जांच-पड़ताल और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही, भारत को ऐसी संकट प्रबंधन योजनाएं विकसित करनी चाहिए जो एआई से संभावित खतरों से बचाव कर सकें।