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भारत को वैश्विक नेतृत्व के लिए पहले पड़ोसी देशों से संबंध मजबूत करने होंगे
भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने से पहले दक्षिण एशिया में अपने संबंधों को सुदृढ़ करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को किसी भी बाहरी दबाव में आए बिना अपने क्षेत्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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भारत के सामने वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का लक्ष्य है, लेकिन इससे पहले उसे अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश नीति विशेषज्ञों का तर्क है कि क्षेत्रीय स्थिरता के बिना भारत वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका नहीं निभा सकता।
1991 के आर्थिक और बाहरी संबंधों के संकट का स्मरण करते हुए विशेषज्ञों ने रेखांकित किया है कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की आवश्यकता है। यह दृष्टिकोण भारत की दीर्घकालीन राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को किसी भी विश्वशक्ति द्वारा किए जाने वाले दबाव का प्रतिरोध करना चाहिए और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखना चाहिए। दक्षिण एशिया में भारत की प्रभावशाली भूमिका पहले क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के माध्यम से ही संभव है।