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बुजुर्गों और रोगियों के लिए मजबूत सामाजिक सहायता जरूरी: माधुसूदन साई
भारत को अपने बुजुर्ग नागरिकों और बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए अधिक सशक्त सामाजिक समर्थन प्रणाली विकसित करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई खामियां हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
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देश के सामाजिक कल्याण ढांचे को मजबूत बनाने की तत्काल आवश्यकता है। माधुसूदन साई ने कहा है कि भारत में बुजुर्ग जनसंख्या और दीर्घकालीन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए समर्पित सहायता व्यवस्था में कमी है। मौजूदा नीतियां अक्सर इन कमजोर वर्गों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में विफल रहती हैं।
भारतीय समाज में तेजी से जनांकिकीय बदलाव हो रहे हैं। बुजुर्ग आबादी में वृद्धि और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के प्रसार के साथ, परिवार-केंद्रित देखभाल मॉडल अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का विचार है कि सरकार, समाज और निजी क्षेत्र को मिलकर एक व्यापक समाधान तैयार करना होगा।
विशेषज्ञों ने बताया है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, वित्तीय सहायता और सामाजिक एकीकरण के मामले में भारत पिछड़ा हुआ है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और महंगी चिकित्सा सेवाएं गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस विषमता को दूर करने के लिए नई नीतियां बनाने की आवश्यकता है।
सामाजिक सहायता प्रणालियों को व्यावहारिक और सुलभ बनाना होगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को वृद्धाश्रमों, दिवस केंद्रों और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में निवेश बढ़ाना चाहिए। साथ ही, समुदाय-आधारित देखभाल कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने की भी आवश्यकता है।