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शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश से भारत बच सकता है मध्यम आय के जाल से

प्रख्यात फ्रांसीसी अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी का मानना है कि भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के साथ ही वैश्विक गठबंधन में भागीदारी से समावेशी विकास हासिल करना होगा।

LSN India · 15 September 2026

शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश से भारत बच सकता है मध्यम आय के जाल से

भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम आय के जाल से निकल सकती है, लेकिन इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की आवश्यकता होगी। यह बात प्रमुख अर्थशास्त्री और असमानता विशेषज्ञ थॉमस पिकेटी ने मंगलवार को कही।

मध्यम आय का जाल एक आर्थिक परिस्थिति है जिसमें कोई देश श्रम-गहन वस्तुओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता क्योंकि मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक होती है। साथ ही, वह उच्च मूल्य वाली गतिविधियों में भी प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता क्योंकि उत्पादकता कम होती है। इसके परिणामस्वरूप विकास धीमा रहता है, मजदूरी स्थिर या गिरती है और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बढ़ती है।

पिकेटी के अनुसार, भारत का वैश्विक गठबंधन में भागीदारी समावेशी और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि केवल एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से ही भारत अपनी आर्थिक संरचना को मजबूत कर सकता है और लंबी अवधि में स्थायी वृद्धि हासिल कर सकता है।

भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए मानव पूंजी विकास को प्राथमिकता देना तथा सामाजिक क्षेत्र में सुधार करना वर्तमान समय की मांग है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश न केवल आर्थिक विकास को बढ़ाएगा बल्कि समाज के सभी वर्गों को विकास के लाभ से जोड़ेगा।